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शुक्रवार, 26 मई 2017

Laxmirangam: निर्णय

Laxmirangam: निर्णय: निर्णय ( भाग -1) बी एड में अलग अलग कॉलेजो से आए हुए अलग अलग विधाओं के विद्यार्थी थे । सबकी शैक्षणिक योग्यताएँ भी समान नहीं थीं । रजत ...

बुधवार, 24 मई 2017

एक ग़ज़ल : ज़रा हट के---ज़रा बच के---

           एक मज़ाहिका ग़ज़ल :---ज़रा हट के ---ज़रा बच के---


मेरे भी ’फ़ेसबुक’ पे कदरदान बहुत हैं
ख़ातून भी ,हसीन  मेहरबान  बहुत हैं

"रिक्वेस्ट फ़्रेन्डशिप" पे हसीना ने ये कहा-
"लटके हैं पाँव कब्र में ,अरमान बहुत हैं"

’अंकल’ -न प्लीज बोलिए ऎ मेरे जान-ए-जाँ
’अंकल’, जो आजकल के हैं ,शैतान बहुत हैं

टकले से मेरे चाँद पे ’हुस्ना !’ न जाइओ
पिचके भले हो गाल ,मगर शान बहुत है

हर ’चैट रूम’ में सभी हैं जानते मुझे
कमसिन से,नाज़नीन से, पहचान बहुत है

पहलू में मेरे आ के ज़रा बैठिए ,हुज़ूर !
घबराइए नहीं ,मेरा ईमान बहुत है 

’बुर्के’ की खींच ’सेल्फ़ी’ थमाते हुए कहा 
"इतना ही आप के लिए सामान बहुत है"

’व्हाट्अप’ पे सुबह-शाम ’गुटर-गूँ" को देख कर
टपकाएँ लार शेख जी ,परेशान बहुत हैं

आदत नहीं गई है ’रिटायर’ के बाद भी
’आनन’ पिटेगा तू कभी इमकान बहुत है

बेगम ने जब ’ग़ज़ल’ सुनी ,’बेलन’ उठा लिया
’आनन मियां’-’बेलन’ मे अभी जान बहुत है


-आनन्द.पाठक-
08800927181

शब्दार्थ
हुस्ना   = हसीना
इमकान = संभावना
"गुटर-गूं" = आप सब जानते होंगे नहीं तो किसी ’कबूतर-कबूतरी’ से पूछ लीजियेगा
हा हा हा


♥कुछ शब्‍द♥: #बसयूँही

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मंगलवार, 23 मई 2017

♥कुछ शब्‍द♥: युद्ध

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Laxmirangam: पुस्तक प्रकाशन

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सोमवार, 22 मई 2017

Laxmirangam: पुस्तक प्रकाशन

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रविवार, 21 मई 2017

चन्द माहिया :; क़िस्त 40

चन्द माहिया : क़िस्त 40

:1:
जीवन की निशानी है
रमता जोगी है
और बहता पानी है

;2:
मथुरा या काशी क्या
मन ही नहीं चमका
घट क्या ,घटवासी क्या

:3:
ख़ुद को देखा होता
मन के दरपन में
क्या सच है ,पता होता

:4:
बेताब न हो , ऎ दिल !
सोज़-ए-जिगर तो जगा
फिर जा कर उन से मिल

:5;
ये इश्क़ इबादत है
दैर-ओ-हरम दिल में
और एक ज़ियारत है



-आनन्द.पाठक-
08800927181

शब्दार्थ
सोज़-ए-जिगर = अन्त: की अग्नि